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- Uses Of Functions - फंक्शंस के उपयोग
i]. जब स्टेटमेंट के ब्लॉक को बार-बार लिखना या निष्पादित (क्रियान्वित या एडिक्यूट) करना होता है, तो फंक्शन बहुत उपयोगी होते हैं। ii]. फ़ंक्शन तब उपयोगी होते हैं, जब प्रोग्राम का आकार बहुत अधिक या जटिल हो जाता हैं। प्रत्येक फंक्शंस को मुख्य (main) प्रोग्राम से हर कार्य को क्रमिक रूप से करने के लिए को कहा जाता है या बुलाया जाता हैं। यह किसी समस्या को हल करने के लिए टॉप-डाउन मॉड्यूलर प्रोग्रामिंग तकनीक की तरह होता है। iii]. किसी प्रोग्राम को डिबग करने के दौरान कठिनाइयों (समस्याओं) को कम करने के लिए फ़ंक्शंस का भी उपयोग किया जाता है।
- The Function Structure ( फंक्शन स्ट्रक्चर )
सी भाषा में फंक्शन का सामान्य रूप निम्नानुसार हैं; data_type, function-name (argument list) argument declaration; { local variable declaration; body of the function; return (expression); } data_type उस मान के डेटा टाईप को निर्दिष्ट करता है, जो फ़ंक्शन प्रदान करेगा। यदि कोई प्रकार निर्दिष्ट नहीं है, तो फ़ंक्शन को एक पूर्णांक परिणाम वापस करने के लिए माना जाता है। ऑरग्यूमेंट्स अल्पविराम (Commas) द्वारा अलग किए जाते हैं। यदि फ़ंक्शन परिभाषा के अंतर्गत में कोई ऑरग्यूमेंट्स शामिल नहीं है, तो खाली कोष्ठकों की एक जोड़ी (युग्म) को function_name का पालन करना चाहिए। कोष्ठकों में प्रदर्शित होने वाले ऑरग्यूमेंट्स को फॉर्मल पैरामीटर या फॉर्मल ऑरग्यूमेंट्स भी कहा जाता है। फंक्शन की बॉडी का निर्माण एक अथवा अधिक स्टेटमेंट्स से हों सकता हैं।
- Functions In C - सी में फंक्शन्स
इस ट्यूटोरियल में, आपको C प्रोग्रामिंग में फ़ंक्शंस (उपयोगकर्ता-परिभाषित और मानक लाइब्रेरी फ़ंक्शंस दोनों) से परिचित कराया जाएगा। साथ ही, आप यह भी जानेंगे कि प्रोग्रामिंग में फंक्शन का उपयोग क्यों किया जाता है। What Is Functions In C? ( सी में फंक्शन क्या है? ) फ़ंक्शंस सी प्रोग्रामिंग के लिए केंद्रीय (central) होता हैं और उप-कार्यों ( Subtasks ) की एक श्रृंखला के रूप में प्रोग्राम समाधान (solution) को पूरा करने के लिए उपयोग किए जाते हैं। एक फ़ंक्शन कोड का एक ब्लॉक और स्व-निहित (self-contained) प्रोग्राम सेगमेंट है जो एक विशिष्ट और अच्छी तरह से परिभाषित कार्य करता है। एक बड़ी समस्या को छोटे-छोटे खंडों में विभाजित करना पड़ता है ताकि इसे कुशलता से हल किया जा सके। For Example; मान लीजिए, आपको एक वृत्त बनाने और उसे रंगने के लिए एक प्रोग्राम बनाने की आवश्यकता होती है। आप इस समस्या को हल करने के लिए दो कार्य बना सकते हैं: एक सर्कल फंक्शन बनाएँ। एक रंग फंक्शन बनाएँ। एक जटिल समस्या को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटना हमारे प्रोग्राम को समझने और पुन: उपयोग करने में आसान बनाता है।
- History Of Computer - कंप्यूटर का इतिहास
शुरुआती दिनों में आदमी अपनी उंगलियों से गिनता था और मैन्युअल रूप से संख्याओं में हेरफेर करता था। गिनती के पहले यंत्र का प्रयोग आदिम लोग ( Primitive People ) करते थे। वे लाठी, पत्थर और हड्डियों को गिनने के औजार के रूप में इस्तेमाल करते थे। लेकिन तकनीकी विकास ने तेज कंप्यूटिंग डिवाइस माँग कर दिया, इससे कंप्यूटर का विकास हुआ। अबेकस ( Abacus ) और पर्सनल कंप्यूटर ( PC ) ऐसे दो उपकरण हैं, जिन्हें हजारों वर्षों के इतिहास से अलग किया गया है। इसे कुछ लोकप्रिय कंप्यूटिंग उपकरणों का वर्णन निम्नलिखित भागों में देखा जा सकता है; {01}. Early Calculating Devices ( प्रारंभिक गणना उपकरण ) Abacus ( अबेकस ) कंप्यूटर का इतिहास अबेकस के जन्म से शुरू होता है जिसे पहला कंप्यूटर माना जाता है। अबेकस का उपयोग 500 ईसा पूर्व ( 5000 BC ) में गिनती और गणना के लिए किया जाता था। इसमें एक फ्रेम होता है, जिसके चारों ओर कुछ छड़ें लगी होती हैं। प्रत्येक बार में कुछ मोती होते थे, जिन्हें प्रत्येक बार के साथ ले जाया जा सकता था। प्रत्येक मोती संख्या प्रणाली ( Number System ) में एक स्थान का प्रतिनिधित्व करता है। अबेकस आयताकार फ्रेम में बना तारों का एक ढ़ाचा हैं. तथा उन तारों में गोल मोती पिरोयी रहती हैं. इन्हीं मोतियों की मदद से अंको को जोड़ने, घटाने, गुणा व भाग जैसी गणनाएँ की जाती हैं. गणना करने के लिए इन मोतियों, जिन्हें Beads भी कहते हैं. उन्हें तारों पर सरकाया जाता हैं। अबेकस का अविष्कार बेबीलोन ( Babylonian ) में 2400 ई.पू. हो गया था। अबेकस को सोरोबन ( Soroban ) के नाम से भी जाना जाता हैं, इस युक्ति ( Device ) की मदद से बिना कॉपी पेन या कैलकुलेटर के गणितीय क्रियाओं को सरलता से हल किया जा सकता हैं। इस उपकरण की एक छवि नीचे दिखाई गई है; 📝Note:- ऐसा कहा जाता है कि चीनियों ने लगभग 4,000 साल पहले अबेकस का आविष्कार किया था। चीन में इसे "Suanpan" अर्थात पैन की गणना ( Calculating Pan ) कहा जाता है। John Napier’s Bones ( जॉन नेपियर बोन्स ) एक स्कॉटिश ( स्कॉटलैंड के ) गणितज्ञ जॉन नेपियर ने एक उपकरण का आविष्कार किया जिसने उन्हें खगोल विज्ञान में शामिल कठिन गणनाओं को करने में मदद की। इसके लिए उन्होंने नेपियर बोन्स नामक हड्डियों की 9 पट्टियों का इस्तेमाल किया और प्रत्येक को 10 वर्गों में विभाजित किया। पुनः प्रत्येक वर्ग को 2 भागों में बाँटा गया। निचला आधा संकेतित इकाइयाँ और ऊपरी आधा दहाई इंगित करता है। उन्होंने वर्गों को भरने के लिए गुणकों के सिद्धांत ( Principle Of Multiplication ) का इस्तेमाल किया। इस चार्ट की सहायता से वह सभी प्रकार के गुणन कर सकता था। इस यंत्र का आविष्कार 17वीं शताब्दी के प्रारम्भ में किया गया था। नेपियर बोन्स हड्डियों, हाथी के दांत या धातु से बनी छड़ें होती हैं. जिनके उपर नंबर लिखे होते हैं. इस यंत्र को "कार्ड बोर्ड गुणन कैलकुलेटर" ( Card Board Multiplication Calculator ) भी कहते हैं। यह एक मैकेनिकल गणना करने वाली यंत्र हैं, इसका इस्तेमाल अंकों को गुणा और भाग करने के लिए होता हैं। नेपियर बॉन्स में अंकों को गुणन करने की बजाय अंकों को जोड़ की सहायता से गुणा किया जाता हैं।इसके विकसित स्वरूप का इस्तेमाल लगभग 1890 ई. तक किया गया। जॉन नेपियर एक महान गणितज्ञ और फिजिशियन थे, उन्होंने गुणा-भाग करने के लिए इस यंत्र में 9 अलग-अलग तरह की अंक चिन्हित हड्डियों का इस्तेमाल किया था, इसलिए यह गणना यंत्र नेपियर बोन्स ( Napier Bones ) के नाम से जाना जाता हैं। 📝Note:- यह दशमलव बिंदु का उपयोग करने वाली पहली मशीन भी थी। यह एक मैन्युअल रूप से संचालित गणना उपकरण था जिसका आविष्कार मर्चिस्टन के जॉन नेपियर (1550-1617) ने किया था। Oughtred's Slide Rule ( ओट्रेड स्लाइड नियम ) नेपियर ने लघुगणक ( लॉगरिथम ) की विधि भी विकसित की। लॉगरिथम विधि में, गुणा और भाग स्वयं संख्याओं को जोड़कर और घटाकर नहीं किया जा सकता है, बल्कि संबंधित संख्याओं की सहायता से किया जा सकता है, जिन्हें लॉगरिदम कहा जाता है। सभी इंजीनियरिंग गणना लॉगरिदम की मदद से की जा रही है। 1620 में, विलियम ओउट्रेड ने स्लाइड-नियम का आविष्कार किया जो एक कैलकुलेशन डिवाइस है जो लॉगरिदम के सिद्धांत का उपयोग करता है। Pascaline / Pascal's Calculator ( पास्कल का कैलकुलेटर ) 1642 में महान फ्रांसीसी गणितज्ञ और दार्शनिक ब्लेज़ पास्कल ने पहले कार्यात्मक स्वचालित कैलकुलेटर का आविष्कार किया। ब्रास का बना यह आयताकार बॉक्स पास्कलाइन भी कहा गया, जिसे चित्र में दर्शाया गया है। पास्कलीन को अंकगणित मशीन या जोड़ने की मशीन के रूप में भी जाना जाता है। इसका आविष्कार 1642 और 1644 के बीच एक फ्रांसीसी गणितज्ञ-दार्शनिक ब्लेस पास्कल ( Blaise Pascal ) ने किया था। ऐसा माना जाता है कि यह पहला यांत्रिक और स्वचालित कैलकुलेटर था। पास्कल ने इस मशीन का आविष्कार अपने पिता, एक कर लेखाकार की मदद के लिए किया था। यह केवल जोड़ और घटाव ही कर सकता था। यह गियर और पहियों की एक श्रृंखला के साथ एक लकड़ी का बक्सा था। जब एक पहिया एक चक्कर घुमाता है, तो यह पड़ोसी पहिया को घुमाता है। कुल पढ़ने के लिए पहियों के शीर्ष पर खिड़कियों की एक श्रृंखला दी गई है। मशीन में गियर, पहिए और डायल शामिल थे। प्रत्येक पहिए में 10 खंड होते हैं जैसे कि मीलोमीटर या हाउस एनर्जी मीटर। जब एक पहिया ने एक चक्कर पूरा किया, तो अगला पहिया एक खंड में चला गया। इस कैलकुलेटर के साथ, परिधि के चारों ओर 0 से 9 की संख्या वाले पहियों की इन श्रृंखलाओं को डायल करके जोड़ और घटाव किया जा सकता है। 📝Note:- यह मशीन घड़ी और ओडोमीटर के सिद्धान्त पर कार्य करता हैं, जिसे "Adding Machine" कहा गया।
- Characteristics Of Computer - कंप्यूटर की विशेषताएं
यह समझने के लिए कि कंप्यूटर हमारे जीवन का इतना महत्वपूर्ण हिस्सा क्यों है, आइए इसकी कुछ विशेषताओं पर एक नजर डालते हैं। High Speed ( तीव्र गति ) Automation ( स्वचालित ) Accuracy ( सटीकता, शुद्धता, त्रुटि रहित कार्य ) Versatility ( ( कार्य विविधता, सार्वभौमिकता, बहुमुखी प्रतिभा ) High Storage Capacity ( उच्च भंडारण क्षमता ) Personal Storage ( स्थायी भंडारण क्षमता ) Repetitiveness ( पुनरावृत्ति या दोहराव ) Diligence & Agility ( लगन या समर्थन और स्फूर्ति ) Compactness ( सघनता ) Reliability ( विश्वसनीयता ) Cost Reduction ( लागत में कमी ) Quick Decision ( त्वरित निर्णय ) Fast Retrieved ( तेजी से पुनर्प्राप्त ) Secrecy Or Privacy ( गोपनीयता ) Uniformity Of Work ( कार्य की एक रुपता ) Paperless Work ( कागज रहित कार्य ) Remembrance Power Of Computer ( कंप्यूटर की स्मरण शक्ति ) Memory Of Computer ( कंप्यूटर की मेमोरी ) No IQ ( नो आईक्यू ) No Feeling ( कोई भावना नहीं ) Consistency ( संगतता ) No Logical Decision ( कोई तार्किक निर्णय नहीं ) 01. High Speed ( तीव्र गति ) कंप्यूटर की मुख्य विशेषता उसकी गति ( Speed ) हैं। कंप्यूटर किसी भी कार्य को एक मानव की तुलना में अधिक तेज़ी से कर सकता हैं। For Example ( उदाहरण के लिए ) ; आप पैदल चलकर कहीं भी जा सकतें हैं, फिर भी साईकिल, स्कूटर या कार का इस्तेमाल करते हैं, ताकि आप किसी भी कार्य को तेज़ी से कर सकें। मशीन की सहायता से आप कार्य की स्पीड बढ़ा सकते हैं। ठीक इसी प्रकार कंप्यूटर भी किसी भी कार्य को बहुत तेज़ी से कर सकता हैं।कंप्यूटर की स्पीड संबंधित कुछ विशेषताएं इस प्रकार हैं ; कंप्यूटर बहुत तेज़ गति ( Speed ) से कार्य करता हैं। कंप्यूटर एक सेकंड में लाखों गणनाएं और लाखों निर्देशों को संसाधित कर सकता हैं। किसी मनुष्य द्वारा पूरे साल में किए जानें वाले कार्य को कंप्यूटर कुछ ही सेकंड में कर सकता हैं कंप्यूटर प्रोसेसर की गति को हार्ट्ज [𝐇𝐳] में मापते हैं। इसकी डेटा ( Data ) संसाधित करने की गति ( Speed ) को Microsecond [10¯⁶], Nanosecond [10¯⁹] तथा Picoseconds [10¯¹²] में मापा जाता हैं, ये सभी कंप्यूटर की इकाईयां हैं। कंप्यूटर की गति (Speed) को एक सेकंड में प्रोसेस किए गए निर्देशों की संख्या के आधार पर मापा जाता हैं। आमतौर पर, एक कंप्यूटर प्रति सेकंड 3-4 मिलियन निर्देशों को पूरा कर सकता है। वर्तमान में कंप्यूटर एक सेकंड में 𝟏𝟎 लाख ( Million ) से भी अधिक निर्देशों को प्रोसेस ( Process ) कर सकता हैं, अत: कंप्यूटर की गति ( Speed ) को MIPS ( Million Instructions Per Second ) में मापा जाता हैं। इस मशीन का निर्माण ही तीव्र गति से कार्य करने के लिए किया गया है। एक पॉवरफुल कंप्यूटर प्रति सेकंड कई Billion [𝟏𝟎𝟗] सरल अंकगणितीय संचालन करने में सक्षम हैं। इसमें बहुत सारे डेटा ( Data ) को एक साथ प्रोसेस ( Process ) करने की क्षमता होती हैं। a). 1 millisecond = 10-3 or 1/1000 seconds b). 1 microsecond = 10-6 or 1/1000000 seconds c). 1 nanosecond = 10-9 or 1/1000000000 seconds d). 1 picosecond = 10-12 or 1/1000000000000 seconds 02. Automation ( स्वचालित ) स्वचालित इसका तात्पर्य यह हैं कि जब कंप्यूटर एक बार कार्य करना प्रारम्भ कर देता हैं तो कंप्यूटर बिना किसी मदद, सहयता या व्यवधान के उस कार्य को पूरा करता हैं। हम अपने दैनिक जीवन में कई प्रकार की स्वचालित मशीन का उपयोग करते हैं। कंप्यूटर भी अपना पूरा कार्य स्वचालित तरीके से करता हैं। कंप्यूटर अपना कार्य, प्रोग्राम ( Program ) के एक बार लोड ( Load ) हो जानें पर स्वत: करता रहता हैं। कंप्यूटर एक स्वचालित मशीन है, जिसमें गणना के दौरान मानवीय हस्तक्षेप कि संभावना नगण्य होती हैं। हालांकि कंप्यूटर को कार्य करने के लिए निर्देश मुनष्य के द्वारा ही दिए जाते हैं, पर एक बार आदेश दिए जानें के बाद वह बिना रुके काम करता हैं। कंप्यूटर खुद अपने आप कार्य शूरू नहीं कर सकता हैं। वे उन निर्देशों से काम कर सकते हैं, जो सिस्टम ( System ) के अंदर प्रोग्राम ( Program ) के रूप में स्टोर ( Store ) होते हैं। जो निर्दिष्ट करते हैं कि किसी विशेष कार्य को कैसे किया जाता हैं। यह बहुत सारे कार्य को बिना इंसानी हस्तक्षेप के पूरा कर सकता हैं। स्वचालिता ( Automation ) कंप्यूटर की एक बहुत बड़ी खूबी हैं, यह सौंपे गए कार्यों को अपने आप पूरा कर देता हैं। 03. Accuracy ( सटीकता, शुद्धता, त्रुटि रहित कार्य ) कंप्यूटर बहुत उच्च स्तर की सटीकता प्रदर्शित करते हैं। त्रुटियां जो आमतौर पर गलत डेटा, गलत निर्देश या चिप्स में बग के कारण हो सकती हैं - सभी मानवीय त्रुटियां। कंप्यूटर अपना सारा कार्य बिना किसी गलती के करता हैं, यदि आपको 𝟏𝟎 अलग-अलग संख्याओं का गुणा कराने के लिए कहा जाए तो आप कई बार गलती करेंगे। लेकिन साधारणत: कंप्यूटर किसी भी प्रोसेस ( Process ) या कार्य को बिना किसी गलती के पूर्ण कर सकता हैं। कंप्यूटर द्वारा गलती किए जाने का सबसे बड़ा कारण गलत डेटा ( Data ) इनपुट ( Input ) करना होता हैं, क्योंकि कंप्यूटर स्वयं कभी कोई गलती नहीं करता हैं। कंप्यूटर बहुत तेज़ होने के आलावा बहुत सटीक हैं, यदि इनपुट ( Input ) सही हैं तो कंप्यूटर 𝟏𝟎𝟎% परीणाम ( Result ) और सही आऊटपुट भी ( Output )देता हैं। किसी विशेष कंप्यूटर की सटीकता की डिग्री ( Degree ) उसके डिजाइन पर निर्भर करती हैं। इसकी गणना शत प्रतिशत त्रुटि रहित ( Error Free ) होता हैं।गणना के दौरान अगर कोई त्रुटि [Errors] पाई भी जाती हैं तो वह प्रोग्राम ( Program ) या डेटा (Data ) में मानवीय गलतियों के कारण होती हैं। इसके परिणामों की शुद्धता मानव परिणामों की तुलना में बहुत ज्यादा होती हैं। कंप्यूटर 𝐆𝐈𝐆𝐎 ( Garbage In Garbage Out ) सिद्धांत पर कार्य करता हैं। 04. Versatility ( कार्य विविधता, सार्वभौमिकता, बहुमुखी प्रतिभा ) कंप्यूटर डेटा प्रविष्टि और टिकट बुकिंग से लेकर जटिल गणितीय गणनाओं और निरंतर खगोलीय प्रेक्षणों तक कई प्रकार के कार्य कर सकते हैं। यदि आप आवश्यक डेटा को सही निर्देशों के साथ इनपुट कर सकते हैं, तो कंप्यूटर प्रोसेसिंग करेगा। कंप्यूटर की सहायता से विभिन्न प्रकार के कार्य संपन्न किए जा सकते हैं।आधुनिक कंप्यूटर्स में अलग ही अलग तरह के कार्य एक साथ करने की क्षमता हैं। कंप्यूटर गणितीय कार्यों को करने के साथ-साथ व्यवसायिक कार्यों के लिए भी प्रयोग में लाया जाने लगा हैं। कंप्यूटर का प्रयोग हर क्षेत्र में होने लगा हैं। जैसे:- बैंक, रेल्वे, एयरपोर्ट, बिज़नेस, वेब डेवलपमेंट, ग्राफ़िक डिज़ाइनर आदि। यह कंप्यूटर के बारे में सबसे शानदार विशेषताओं में से एक हैं। कंप्यूटर एक बहु -उद्देश्यीय मशीन हैं। इसके द्वारा हम टाइपिंग, डॉक्यूमेंट, रिपोर्ट्स, ग्राफिक्स, वीडियो, ईमेल,आदि सभी जरूरी काम कर सकते हैं। इस पर एक साथ कई विषयों , क्षेत्रों के कार्य किए जा सकते हैं। 05. High Storage Capacity ( उच्च भंडारण क्षमता ) कंप्यूटर फाइलों के पारंपरिक भंडारण की लागत के एक अंश पर बहुत बड़ी मात्रा में डेटा संग्रहीत कर सकते हैं। साथ ही, कागज से जुड़े सामान्य टूट-फूट से डेटा सुरक्षित होता है। कंप्यूटर के बाह्य ( External ) तथा आंतरिक ( Internal ) संग्रहण माध्यमों ( जैसे कि हार्ड डिस्क, फ्लॉपी डिस्क, मैग्नेटिक टेप, सीडी, रॉम ) में असीमित डेटा ( Data ) और सूचना ( Information ) का संग्रहण किया जा सकता हैं। कंप्यूटर में सूचनाएं ( Information ) कम स्थान घेरती हैं, अतः इसकी भंडारण क्षमता विशाल और असिमित हैं। यह सभी प्रकार के डेटा, पिक्चर्स, टेक्स्ट, फाइल्स, प्रोग्राम, गेम्स और साउंड, वीडियो को कई वर्षों तक स्टोर ( Store ) करके रख सकते हैं तथा बाद में हम कभी भी किसी भी सूचना को कुछ ही सेकंड में प्राप्त कर सकते हैं तथा अपने उपयोग में ला सकते हैं। स्टोरेज स्पेस के कारण कंप्यूटर कार्य की दोहराव से बच जाता हैं। मानव की तुलना में कंप्यूटर की मेमोरी ( Memory ) बहुत ज्यादा और विशाल होती हैं। कंप्यूटर मेमोरी को कम या ज्यादा किया जा सकता हैं। जो हम इंसान नहीं कर सकते हैं। किसी एक कंप्यूटर की मेमरी ( Memory ) को दूसरे कंप्यूटर के साथ इस्तेमाल किया जा सकता हैं। 06. Personal Storage Capacity ( स्थायी भंडारण क्षमता ) कंप्यूटर में प्रयुक्त मेमोरी को डाटा, सूचना और निर्देशों के स्थायी भंडारण के लिए प्रयोग किया जाता हैं। चूंकि कंप्यूटर में सूचनाएं इलेक्ट्रॉनिक तरीके से संग्रहित की जाती हैं। अत: सूचना के समाप्त या नष्ट होने की संभावना कम रहती हैं। 07. Repetitiveness ( पुनरावृत्ति या दोहराव ) कंप्यूटर किसी भी कार्य को स्थायी रुप से हमारी आवश्यकता के अनुसार दोहराव कर सकता हैं। यदि कंप्यूटर को किसी कार्य को जीतने भी बार दोहराने के लिए कहा जाए तो वह उस कार्य को उतनी ही बार दोहरा सकता हैं। 08. Diligence & Agility ( लगन या समर्थन और स्फूर्ति ) कंप्यूटर अपने सभी कार्य को अपने पूरे लगन और समर्थन के साथ करता हैं। कंप्यूटर के कार्य में कभी भी किसी प्रकार की कमी नहीं होती हैं। कंप्युटर इक मशीन होने के कारण मानवीय दोषों से रहित हैं। इसे थकान तथा बोरियत महसूस नहीं होती हैं और हर बार समान क्षमता से कार्य करता हैं। 09. Compactness ( सघनता ) वर्तमान समय में कंप्यूटर अपने आकार एवं प्रकार के कारण किसी भी स्थान पर ले जाया जा सकता हैं और उसका रख-रखाव भी आसान हैं। Compactness कंप्यूटर का प्रमुख उदाहरण लैपटॉप और टैबलेट हैं। 10. Reliability ( विश्वसनीयता ) कंप्यूटर एक ही प्रकार के कार्य को बार-बार कर सकता है बिना थकान या ऊब के कारण त्रुटियाँ फेंके, जो कि मनुष्यों में बहुत आम है। कंप्यूटर जो हमारे द्वारा दिए गए निर्देशों का आउटपुट (रिज़ल्ट) देता हैं वह बहुत ही विश्वसनीय होता हैं। कम्प्यूटर विश्वसनीय तभी होता हैं जब कंप्यूटर प्रोग्राम में दिए गए डेटा, निर्देश सही हों। ग़लत और अविश्वसनीय ( Unreliable ) प्रोग्राम और डेटा कंप्यूटर में त्रुटियां ( error ) लाने के लिए जिम्मेदार होता हैं। 11. Cost Reduction ( लागत में कमी ) जैसे-जैसे कंप्यूटरीकरण (computerization) बढ़ रहा हैं। वैसे वैसे इसकी लागत में बहुत परिवर्तन हो रहा हैं और यह कम से कम दाम में उपलब्ध हों रहें हैं, जिससे इसका उपयोग हर श्रेणी या क्षेत्र में लोग उपयोग कर रहें हैं। 12. Quick Decision ( त्वरित निर्णय ) कंप्यूटर परिस्थितियों का विश्लेषण कर पूर्व में दिए गए डेटा, निर्देशों के आधार पर तीव्र निर्णय लेने की क्षमता रखता हैं। 13. Fast Retrieved ( तेजी से पुनर्प्राप्त ) कंप्यूटर में प्रयोग द्वारा कुछ ही सेकंड में भंडारित सुचना या सेव किए गए डेटा में से आवश्यक सूचना को प्राप्ति किया जा सकता हैं। रैम ( RAM -Random Access Memory ) के प्रयोग से यह काम और भी आसान हो गया हैं। 14. Secrecy Or Privacy ( गोपनीयता ) पासवर्ड (Password) के प्रयोग द्वारा कंप्यूटर के कार्य को गोपनीय बनाया जा सकता हैं। पासवर्ड के प्रयोग से कंप्यूटर में रखें डाटा और प्रोग्रामों को केवल पासवर्ड जानने वाला व्यक्ति ही देख या बदल सकता हैं। 15. Uniformity Of Work ( कार्य की एक रुपता ) बार-बार तथा लगातार एक ही कार्य करने के बाबजूद कंप्यूटर के कार्य की गुणवत्ता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता हैं। 16. Paperless Work ( कागज रहित कार्य ) कंप्यूटर के सही प्रयोग से कागज़ की खपत में कमी की जा सकती हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती हैं। 17. Remembrance Power Of Computer ( कंप्यूटर की स्मरण शक्ति ) कंप्यूटर में किसी भी डेटा या सूचना को जब तक हम चाहें, स्टोर करने की शक्ति होती है। जरूरत पड़ने पर डाटा को आसानी से रिकॉल भी किया जा सकता है। यह तय करना हमारी पसंद है कि हम कंप्यूटर पर कितना डेटा स्टोर करना चाहते हैं और इन डेटा को कब याद करना या मिटाना है। 18. Memory Of Computer ( कंप्यूटर की मेमोरी ) कंप्यूटर में एक अंतर्निहित मेमोरी होती है, जहां यह तत्काल डेटा को तुरंत स्टोर कर सकता है। यहां, हम रैंडम एक्सेस मेमोरी - RAM ( प्राथमिक मेमोरी ) की बात कर रहे हैं, जो तब तक डेटा रखती है जब तक कंप्यूटर किसी पावर स्रोत से जुड़ा होता है। कंप्यूटर को बंद करने के बाद मेमोरी से डेटा मिटा दिया जाता है। इसके अलावा, कंप्यूटर में ROM ( रीड ओनली मेमोरी ), विभिन्न स्तरों की कैशे मेमोरी, वर्चुअल मेमोरी आदि शामिल हैं, जिससे प्रदर्शन में तेजी आती है। 19. No IQ ( नो आईक्यू ) कंप्यूटर एक गूंगा मशीन ( Dumb machine ) है और यह यूजर के निर्देश के बिना कोई भी काम नहीं कर सकता है। यह जबरदस्त गति और सटीकता के साथ निर्देशों का पालन करता है। यह आपको तय करना है कि आप क्या करना चाहते हैं और किस क्रम में करना चाहते हैं। इसलिए एक कंप्यूटर अपना निर्णय स्वयं नहीं ले सकता जैसा कि हम इंसान कर सकते हैं। 20. No Feeling ( कोई भावना नहीं ) इसमें भावना या भावना, स्वाद, ज्ञान और अनुभव नहीं होता है। इस प्रकार यह लंबे समय तक काम करने के बाद भी थकता नहीं है। यह उपयोगकर्ताओं के बीच अंतर नहीं करता है। 21. Consistency ( संगतता ) कंप्यूटर एक सुसंगत मशीन है, इसका मतलब है कि कंप्यूटर अधिक काम करने से कभी नहीं थकता। आप अपने कार्य को बिना किसी त्रुटि के कई घंटों तक करने के लिए कंप्यूटर का उपयोग कर सकते हैं, घंटों की संख्या का मतलब है कि आप अपने कंप्यूटर सिस्टम का उपयोग दिन में 24 घंटे और वर्ष में 365 दिन लगातार कर सकते हैं। 22. No Logical Decision ( कोई तार्किक निर्णय नहीं ) कंप्यूटर खुद सोच और निर्णय नहीं ले सकता। लेकिन कंप्यूटर प्रोग्राम को इस तरह से लिखा जा सकता है कि यह तार्किक निर्णय लेता है। फिर भी, यह सिर्फ इंसानों द्वारा लिखा गया प्रोग्राम है, जिसे कंप्यूटर द्वारा निष्पादित किया जाता है। Do you know? ( क्या आप जानते हैं? ) भारत में कंप्यूटर का प्रथम प्रयोग 16 अगस्त, 1986 को बेंगलुरु ले प्रधान डाकघर में किया गया। जबकि भारत का प्रथम पूर्ण कंप्यूटरीकृत डाकघर नई दिल्ली हैं।
- Definition Of Computer - कंप्यूटर की परिभाषा
कम्प्यूटर एक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हैं, जो उपयोगकर्ता (User) द्वारा इनपुट किये गए डेटा (Data) में प्रक्रिया करके सूचनाओं को परिणाम (Result) के रूप में प्रदान करता हैं, अर्थात कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन हैं। जो उपयोगकर्ता द्वारा दिए गए निर्देशों ( Instructions ) का पालन करता हैं, इसमें डेटा को स्टोर, पुनर्प्राप्त और प्रक्रिया ( Process ) करने की क्षमता होती हैं। आप डाक्यूमेंट को टाइप करने, ईमेल भेजने, गेम खेलने और वेब ब्राउज करने, आदि के बहुत से चीजों लिए कम्प्यूटर का उपयोग किया जाता हैं। ऑक्सफॉर्ड डिक्शनरी के अनुसार, "कंप्यूटर एक स्वचालित इलेक्ट्रॉनिक मशीन हैं, जो अनेक प्रकार की तर्कपूर्ण गणनाओं के लिए प्रयोग किया जाता हैं।" What Is A Computer Called? ( कंप्यूटर किसे कहते हैं? ) "कंप्यूटर एक प्रोग्राम योग्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो यूजर द्वारा इनपुट किये गए डेटा को प्रोसेस करके परिणाम को आउटपुट के रूप में प्रदान करता हैं, उसे कंप्यूटर कहते हैं।"
- What Is A Computer? - कंप्यूटर क्या हैं?
"कंप्यूटर एक ऐसी मशीन हैं, जो कुछ निर्देशों के साथ कार्य को सम्पादित करता हैं और सीधी बात में कहे तो कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हैं, जो इनपुट उपकरणों की मदद से आंकड़ों को स्वीकार करता हैं और उन्हें प्रोसेस करता हैं और उन्हें प्रोसेस करता हैं तथा उन आंकड़ों को आउटपुट उपकरणों की मदद से सुचना के रूप में प्रदान करता हैं।" कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जो सूचना या डेटा में हेरफेर करता है। इसमें डेटा को स्टोर करने, पुनर्प्राप्त करने और संसाधित करने की क्षमता होती है।आप पहले से ही जानते होंगे कि आप दस्तावेज़ लिखने, ईमेल भेजने, गेम खेलने और वेब ब्राउज़ करने के लिए कंप्यूटर का उपयोग कर सकते हैं। इसके आलावा भी कंप्यूटर के बहुत सारे उपयोग है। इन सब के आलावा भी कंप्यूटर के बहुत से उपयोग वर्त्तमान में हो रहे हैं और भविष्य में इसका उपयोग और अधिक क्षेत्रों में होने वाला हैं।
- Basic Introduction Of Computer - कंप्यूटर का मूल परिचय
आधुनिक युग में, कंप्यूटर हमारे रोजमर्रा के अस्तित्व का एक अनिवार्य हिस्सा हैं। इसका मतलब है कि कंप्यूटर लगभग हर क्षेत्र में मौजूद हैं, जिससे हमारे दिन-प्रतिदिन के कार्य आसान और तेज हो गए हैं। आजकल हमारे घर सहित बैंकों, दुकानों, स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे और कई अन्य जगहों पर कंप्यूटर देखे जा सकते हैं। चूंकि वे हमारे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा हैं, इसलिए हमें बुनियादी कंप्यूटर परिचय के बारे में पता होना चाहिए। कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो उपयोगकर्ता के निर्देशों के अनुसार इनपुट प्राप्त करता है, स्टोर करता है या इनपुट को संसाधित करता है और वांछित प्रारूप में आउटपुट प्रदान करता है। कंप्यूटर हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन गए हैं क्योंकि वे बिना बोर हुए आसान कामों को बार-बार पूरा कर सकते हैं और जटिल को बिना गलती किए बार-बार पूरा कर सकते हैं। इस ट्यूटोरियल में हम कंप्यूटर के विभिन्न हिस्सों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे जो इसे कुशलतापूर्वक और सही ढंग से कार्यों को करने में सक्षम बनाता है। हम माइक्रोप्रोसेसरों, कंप्यूटरों के मस्तिष्क के बारे में भी चर्चा करेंगे, जो वास्तव में सभी नियत कार्यों को करते हैं। आइए पहले कंप्यूटर को परिभाषित करने के साथ शुरू करें;
- Structure Of C Program -सी प्रोग्राम की संरचना
C प्रोग्राम हमें लिखे जाने के लिए एक संरचित रूप (Structured Form) का अनुसरण करता है। प्रत्येक प्रोग्राम का एक उचित परिभाषित क्रम स्टेटमेंट्स का होता हैं। सी प्रोग्राम की संरचना का मतलब सी भाषा में प्रोग्रामिंग शुरू करने के लिए विशिष्ट संरचना है। उचित संरचना के बिना समस्या और समाधान का विश्लेषण करना कठिन हो जाता है। यह हमें अधिक जटिल प्रोग्राम लिखने का संदर्भ भी देता है। Importance Of Structure Of A C Program ( सी प्रोग्राम की संरचना का महत्व ) कभी-कभी, जब हम एक नई प्रोग्रामिंग भाषा के साथ शुरुआत करते हैं, तो हमें प्रोग्राम की मूल संरचना के बारे में जानकारी नहीं होती है। किसी प्रोग्राम के अनुभागों में आमतौर पर फेरबदल किया जाता है और त्रुटि के छूटने की संभावना बढ़ जाती है। एक भाषा की संरचना हमें एक कार्यक्रम में अनुभागों के क्रम का एक मूल विचार देती है। हमें पता चलता है कि कब और कहाँ किसी विशेष स्टेटमेंट, वेरिएबल, फंक्शन, कर्ली ब्रेसेस, कोष्ठक आदि का उपयोग करना है। यह उस प्रोग्रामिंग भाषा में हमारी रुचि को भी बढ़ाता है। इस प्रकार, संरचना हमें कम से कम त्रुटियों के लिए प्रोग्राम लिखने के लिए प्रारूप का विश्लेषण करने में मदद करती है। यह बेहतर स्पष्टता और एक कार्यक्रम की अवधारणा देता है। यहां, हम सी प्रोग्राम के अनुभागों, स्पष्टीकरण के साथ कुछ व्यावहारिक उदाहरण, सी प्रोग्राम को संकलित करने और निष्पादित करने के चरणों पर चर्चा करेंगे। Sections/Block Of A C program ( एक सी प्रोग्राम के अनुभाग / ब्लॉक ) C प्रोग्राम के अनुभाग नीचे सूचीबद्ध हैं या सी प्रोग्राम की संरचना इस प्रकार निम्न होती हैं; Documentation Section ( दस्तावेज़ीकरण अनुभाग ) Preprocessor Section Or Link Section ( प्रीप्रोसेसर अनुभाग या लिंक अनुभाग ) Definition Section Or Declare Section ( परिभाषा अनुभाग या डिफाइन अनुभाग ) Global Declaration Section ( वैश्विक घोषणा अनुभाग ) Main Function Section ( मेन फंक्शन अनुभाग ) User Defined Functions Section ( उपयोगकर्ता परिभाषित फंक्शन अनुभाग ) आइए एक उदाहरण की मदद से सी प्रोग्राम के हर बुनियादी घटक पर चर्चा करें। /* Documentation section C programming structure Author: Romeyo Boy */ #include /* Link section */ int subtract = 0; /* Global declaration, definition section */ int all (int, int); /* Function declaration section */ int main () /* Main function */ { printf("Welcome To Creative Bloke C Programming Tutorials!\n\n"); printf ("This Is A C program \n"); subtract= all (36,10); printf ("Subtraction Of The Two Numbers : %d \n", subtract); return 0; } int all (int x, int y) /* User defined function */ { return x-y; /* definition section */ } ♻️Output; Welcome To Creative Bloke C Programming Tutorials! This Is A C program Subtraction Of The Two Numbers : 26 01 | Documentation Section ( दस्तावेज़ीकरण अनुभाग ) दस्तावेज़ीकरण ब्लॉक में, उपयोगकर्ता प्रोग्राम का विवरण (Description), उसका लक्ष्य (Goal), प्रोग्राम का शीर्षक (Title), लेखक का नाम (Author Name) आदि लिख सकता है। यह दस्तावेज़ीकरण बाद में आवश्यक होने पर आगे के संशोधनों के लिए किसी की मदद करता है। इसे इस प्रकार दर्शाया गया है; //name of a program in documentation block Or /* Learn of the code by creative bloke */ दोनों विधियाँ एक प्रोग्राम में दस्तावेज़ अनुभाग के रूप में कार्य करती हैं। यह कार्यक्रम का एक अवलोकन ( Overview ) प्रदान करता है। अंदर लिखी गई कोई भी चीज़ दस्तावेज़ीकरण अनुभाग का हिस्सा मानी जाएगी और निर्दिष्ट कोड में हस्तक्षेप नहीं करेगी। For Example; /** File Name: FirstProgram.c Author: Romeyo Boy Date: 11/30/2021 Description: This Is My First C Program No Input Needed */ 02 | Preprocessor Or Link Section ( प्रीप्रोसेसर या लिंक अनुभाग ) प्रीप्रोसेसर सेक्शन में प्रोग्राम में उपयोग की जाने वाली सभी हेडर फाइलें होती हैं। यह सिस्टम को हेडर फाइल को सिस्टम लाइब्रेरी से लिंक करने के लिए सूचित करता है। इसे इसके द्वारा दिया जाता है; #include #include #include स्टेटमेंट में संकलन के समय किसी फंक्शन के हिस्से के रूप में विशिष्ट फाइल शामिल होती है। इस प्रकार, शामिल फ़ाइल की सामग्री को संकलित किए जाने वाले फ़ंक्शन के साथ संकलित किया जाता है। #include में मानक इनपुट आउटपुट फ़ाइलों की सामग्री शामिल है, जिसमें stdin, stdout और stderr की परिभाषा शामिल है। जब भी किसी फ़ंक्शन में परिभाषाएँ stdin, stdout, और stderr का उपयोग किया जाता है, तो कथन #include का उपयोग करने की आवश्यकता होती है। विभिन्न उद्देश्यों के लिए विभिन्न हेडर फाइलें उपलब्ध हैं। उदाहरण के लिए, # शामिल करें . इसका उपयोग प्रोग्राम में गणितीय कार्यों के लिए किया जाता है। #include #include प्रीप्रोसेसर या लिंक अनुभाग में इन सब हेडर फाइलें के आलावा बहुत सारे हेडर फाइलें भी होते है जिसे हम जरुरत पड़ने पर अपने प्रोग्राम में लिंक कर सकते है | 03 | Definition Or Define Section ( परिभाषा या डिफाइन अनुभाग ) इस ब्लॉक या अनुभाग में, हम विभिन्न स्थिरांकों ( Constants ) को परिभाषित करते हैं। इस भाग में परिभाषित कीवर्ड ( Keyword ) का उपयोग किया जाता है। इसे इसके द्वारा दिया जाता है; #define PI = 3.14 #define a = 4 04 | Global Declaration Section ( वैश्विक घोषणा अनुभाग ) वैश्विक घोषणा अनुभाग के अंदर हम ऐसे वेरिएबल को परिभाषित (Declare) करते है जिनको हम अपने प्रोग्राम में कही भी उपयोग करना चाहते है, ऐसे वेरिएबल वैश्विक वेरिएबल (Global Variable) कहलाते है। इन वेरिएबल्स को हम किसी भी फंक्शन में कही पर भी उपयोग कर सकते है। For Example; float num = 2.54; int a = 5; char ch ='z'; उपरोक्त वैश्विक चर का आकार निम्नानुसार सूचीबद्ध है; char = 1 byte float = 4 bytes int = 4 bytes वैश्विक घोषणा अनुभाग में ही हम ऐसे फंक्शन को भी परिभाषित (Declare) करते है जिनको हम अपने प्रोग्राम में कही भी उपयोग चाहते है और ऐसे फंक्शन वैश्विक फलन या फंक्शन (Global Function) कहलाते है। वैश्विक घोषणा अनुभाग में प्रोग्राम में सभी वैश्विक घोषणाएं शामिल हैं। इसे इस प्रकार दिया जाता है; For Example; int area(int x); // Global Function int n; // Global Variable void main() { statements; . . } 05 | Main Function Section ( मेन फंक्शन अनुभाग ) main( ) कंप्यूटर द्वारा निष्पादित किया जाने वाला पहला फंक्शन है। एक कोड के लिए main( ) को शामिल करना आवश्यक है। यह सी लाइब्रेरी में उपलब्ध किसी भी अन्य फ़ंक्शन की तरह है। किसी फ़ंक्शन में पैरामीटर ( यदि कोई हो ) पास करने के लिए कोष्ठक ( ) का उपयोग किया जाता है। प्रत्येक सी प्रोग्राम में main( )फंक्शन होना चाहिए। प्रत्येक main( ) फंक्शन में 2 भाग होते हैं। Declaration Part ( घोषणा भाग ) Execution Part ( एक निष्पादन भाग ) घोषणा भाग वह हिस्सा है जहां सभी चर ( वेरिएबल ) घोषित किए जाते हैं। निष्पादन भाग ओपन कर्ली कोष्ठक { से शुरू होता है और क्लोज कर्ली कोष्ठक } के साथ समाप्त होता है। घोषणा और निष्पादन दोनों भाग कर्ली कोष्ठक { } के अंदर हैं। int main(void) { int n=15; // Declaration Part printf(“ n = %d “,n); // Execution Part return (0); } हम main( ) के साथ int या main का भी उपयोग कर सकते हैं। void main( ) निर्दिष्ट करता है कि प्रोग्राम कोई मूल्य ( वैल्यू ) नहीं लौटाएगा। int main( ) निर्दिष्ट करता है कि प्रोग्राम पूर्णांक (Integer) प्रकार का डेटा लौटा सकता है। The Parts Of main( ) Functions ( मेन फंक्शन्स के भाग ) मेन फंक्शन को आगे स्थानीय घोषणाओं (Local declarations) कथनों (statements) और एक्सप्रेशंस (expressions) में वर्गीकृत किया गया है। * Local Declarations ( स्थानीय घोषणा ) किसी दिए गए फ़ंक्शन या ब्लॉक के अंदर घोषित किया गया चर ( वेरिएबल ) स्थानीय घोषणाओं के रूप में संदर्भित होता है। main() { int i = 2; i++; } * Statements ( कथनों ) कथन या स्टेटमेंट मेन फंक्शन के भीतर एक प्रोग्राम में उपयोग किए जाने पर if, else, while, do, for आदि को संदर्भित करता है। * Expressions ( एक्सप्रेशंस ) एक एक्सप्रेशन एक प्रकार का सूत्र (Formula) होता है, जहां ऑपरेटरों के उपयोग से ऑपरेंड एक दूसरे के साथ जुड़े होते हैं। इसे इस प्रकार दिया जाता है; a - b; a +b; 06 | User Defined Functions Section ( उपयोगकर्ता परिभाषित फंक्शन अनुभाग ) जब आप किसी विशेष आवश्यकता को पूरा करने वाले अपने फ़ंक्शन को परिभाषित करना चाहते हैं, तो आप उन्हें इस अनुभाग में परिभाषित कर सकते हैं। उपयोगकर्ता परिभाषित फंक्शन उपयोगकर्ता की आवश्यकताओं के अनुसार निर्दिष्ट फंक्शन्स को निर्दिष्ट करते हैं। उदाहरण के लिए color( ), sum( ), division( ), आदि। प्रोग्राम ( मूल या अग्रिम ) ऊपर सूचीबद्ध किए गए समान अनुभागों ( Sections ) का अनुसरण करता है। Return फ़ंक्शन आम तौर पर एक कोड का अंतिम भाग होता है। लेकिन, शामिल करना जरूरी नहीं है। इसका उपयोग तब किया जाता है जब हम कोई मान वापस करना चाहते हैं। Return फ़ंक्शन एक मान देता है जब शून्य के अलावा अन्य Return प्रकार फ़ंक्शन के साथ निर्दिष्ट किया जाता है। Return प्रकार फ़ंक्शन के निष्पादन को समाप्त करता है। यह आगे निर्दिष्ट कॉलिंग फ़ंक्शन ( Calling Function) पर नियंत्रण लौटाता है। इसे इस प्रकार दिया जाता है; return; Or return expression ; For Example; return 0; For Example Of Sample Program To Find The Sum Of Two Numbers Given By The User ( उदाहरण के लिए सैंपल प्रोग्राम के उदाहरण के लिए उपयोगकर्ता द्वारा दी गई दो संख्याओं का योग ज्ञात करते हैं। ) /* Sum Of Two Numbers */ #include int main() { int x, y, sum; printf("Enter Two Numbers To Be Added "); scanf("%d %d", &x, &y); // calculating sum sum = x + y; printf("%d + %d = %d", x, y, sum); return 0; // return the integer value in the sum } ♻️Output; Enter Two Numbers To Be Added 8 9 8 + 9 = 17 Detailed Explanation Of Sample Program ( सैंपल प्रोग्राम की विस्तृत व्याख्या ) ऊपर दिए गए सैंपल प्रोग्राम एक कोड के प्रत्येक भाग की विस्तृत व्याख्या इस प्रकार है;
- C Compiler & IDE Installations - सी कंपाइलर और आईडीई इंस्टॉलेशन
Basic Introduction ( मूल परिचय ) सी के लिए कोई एकल कंपाइलर नहीं है। कई अलग-अलग संगठनों ने सी कंपाइलर्स को लिखा और कार्यान्वित किया है, जो एक दूसरे से अधिक या कम हद तक भिन्न होते हैं। यहां तक कि एक ही कंप्यूटर के लिए, कई अलग-अलग कंपाइलर हो सकते हैं, जिनमें से प्रत्येक की अपनी विशेष आवश्यकताएं होती हैं। इस लेखन के समय, सी आधिकारिक तौर पर मानकीकृत होने की प्रक्रिया में है। फिर भी, हमें छोटी-छोटी भिन्नताओं के लिए तैयार रहना चाहिए जो स्पष्ट हो सकती हैं। सिंटैक्स के मामूली अंतर के लिए भी कंपाइलर बहुत संवेदनशील हो सकते हैं। यदि आप किसी भी कठिनाई का अनुभव करते हैं, तो बस उस मैनुअल से परामर्श लें जो आपके C के संस्करण के साथ आता है या बेहतर अभी भी, किसी ऐसे व्यक्ति से सहायता प्राप्त करें जिसे पहले हाथ का अनुभव हो। What is compiler? ( कंपाइलर क्या होता है? ) आसान शब्दों में अगर समझे तो कम्पाइलर एक एप्लीकेशन ( Application ) होती है जो हमारे कोड को मशीन भाषा ( Machine Language) में परिवर्तित ( Convert ) कर देती है, जिससे की computer हमारे कोड को समझकर उसे निष्पादित और रन ( Execute Or Run ) कर सके। Why Use Compiler? ( कंपाइलर का उपयोग क्यों करें? ) जैसा की आप जानते ही होंगे की कंप्यूटर सिर्फ मशीनी भाषा को ही समझ पाता हैं। जिसमें सिर्फ बाइनरी प्रारूप (Binary Format) में एक 1 और शुन्य 0 का उपयोग होता है। लेकिन हमारे जैसे मनुष्य के लिए मशीनी भाषा को समझना और उसमे कोड करना बहुत ही मुश्किल होता है, इसलिए हम कंप्यूटर प्रोग्राम्स को बनाने के लिए उन प्रोग्रामिंग भाषा का प्रयोग करते हैं, जिनका प्रारूप अंग्रेजी भाषा की तरह मानव पठनीय ( Human-Readable ) होता है। जैसे कि C, Java, Python इत्यादि। जब हम इन प्रोग्रामिंग भाषा के रूल्स और सिंटेक्स को फॉलो करके कोड लिखते हैं तो उस कोड को हमें मशीनी कोड में परिवर्तित ( Convert ) करना होता है और इस काम के लिए हम कंपाइलर का प्रयोग करते हैं। Installing Code Blocks ( कोड ब्लॉक स्थापित करना ) प्रोग्राम बनाने और चलाने के लिए आपको दो चीजों की आवश्यकता होती है Text Editor ( पाठ संपादक ) Compiler ( संकलक ) एक टेक्स्ट एडिटर वह जगह है जहाँ आप अपने प्रोग्राम लिखते हैं। एक कंपाइलर आपके प्रोग्राम को 1s और 0s की बाइनरी स्ट्रीम में ट्रांसलेट करता है जिसे कंप्यूटर समझता है। इसलिए जब भी आप किसी प्रोग्राम को संकलित करते हैं, तो कंपाइलर एक नई बाइनरी फ़ाइल बनाता है जिसे निष्पादन योग्य ( विंडोज़ में .exe एक्सटेंशन वाला ) कहा जाता है, जिसे कंप्यूटर निष्पादित कर सकता है। सी प्रोग्राम लिखते समय आपको जिन चरणों का पालन करने की आवश्यकता है। Create A Program ( एक प्रोग्राम बनाएं ) Compile program ( संकलन कार्यक्रम ) Run program ( प्रोग्राम चलाओ ) आप अपने डिफ़ॉल्ट टेक्स्ट एडिटर जैसे विंडोज़ में नोटपैड या लिनक्स में विम का उपयोग करके अपने प्रोग्राम बना सकते हैं, लेकिन चीजों को आसान बनाने के लिए हम एक क्रॉस-प्लेटफ़ॉर्म आईडीई ( एकीकृत विकास पर्यावरण ) स्थापित करेंगे जिसे कोड ब्लॉक कहा जाता है। Why use an IDE? ( आईडीई का उपयोग क्यों करें? ) आईडीई आपको एक ही वातावरण से प्रोग्राम बनाने, संकलित करने और चलाने की अनुमति देता है कोड ब्लॉक C और C++ प्रोग्राम संकलित करने के लिए जीसीसी (GCC) नामक एक कंपाइलर के साथ आता है। यदि आप IDE का उपयोग नहीं कर रहे हैं तो आपको अपने टेक्स्ट एडिटर का उपयोग करके प्रोग्राम बनाना होगा। फिर प्रोग्राम को संकलित करने के लिए आपको कमांड प्रॉम्प्ट या टर्मिनल खोलने और कुछ कमांड टाइप करने की आवश्यकता है। हम पहले सीखेंगे कि एक आईडीई का उपयोग करके एक साधारण प्रोग्राम कैसे लिखना है, फिर मैं आपको दिखाऊंगा कि आप अपने टेक्स्ट एडिटर का उपयोग करके प्रोग्राम कैसे बना सकते हैं और जीसीसी ( GCC ) कंपाइलर का उपयोग करके इसे संकलित कर सकते हैं। Download CodeBlocks IDE (Compiler) - कोडब्लॉक आईडीई (कंपाइलर) डाउनलोड करें ज्यादातर सभी प्रोग्रामिंग भाषा के अलग-अलग कंपाइलर्स उपलब्ध होते हैं यानी कि आप हम सी भाषा के कंपाइलर से Python या किसी अन्य प्रोग्रामिंग भाषा के कोड को कंपाइल नहीं कर सकते हो। सी भाषा के लिए भी बहुत सारे कंपायलर इन्टरनेट पर उपलब्ध हैं। हम इस सेक्शन में CodeBlocks IDE को इंस्टॉल करना सीखेंगे। Code Block IDE का इंटरफेस बहुत ही यूजर फ्रेंडली और लाइटवेट होता हैं। इस IDE में आपको जीसीसी (GCC) कंपाइलर मिलता हैं, जो कि C और C++ के लिए अच्छा कंपाइलर हैं। इसमें जीसीसी कंपाइलर के आलावा भी errors debugger भी मिलता हैं। जो आपके कोड में त्रुटि (errors) को सही करने में मदद करता हैं। Step - 01}. CodeBlocks IDE को डाउनलोड करने के लिए आप इसकी ऑफिशियल वेबसाइट पर जाइए। जिसका लिंक निचे दीया गाया हैं; Download Now This Link 👉 https://www.codeblocks.org/downloads/binaries/ वहां से आप अपने विंडोज सिस्टम के बिट (32 या 64) के हिसाब से CodeBlocks with MinGW setup executable फ़ाइल को डाउनलोड करें। Step - 02}. डाउनलोड करने के लिए जैसे ही आप 'SourceForge.net' वाले लिंक पर क्लिक करेंगे तो वो वेबसाइट खुल जाएगी और कुछ ही देर में आपका CodeBlocks का सेटअप फाइल्स डाउनलोड होना शुरु हो जाएगा। 📝Note:- आपके लिए MinGW सेटअप का चयन करना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आपके सिस्टम पर GCC कंपाइलर स्थापित करेगा। Step - 03}. डाउनलोड करने के बाद इसे चलाने के लिए सेटअप फाइल को रन करने के लिए डबल क्लिक करें और यह जो परमिशन मांगे उसे अलाऊ कर दें।आपको निम्न विंडो के साथ प्रस्तुत किया जाएगा। जारी रखने के लिए Next दबाएँ। Step - 04}. लाइसेंस समझौते को स्वीकार करें (Agree) और Next पर क्लिक करें। Step - 05}. अगली विंडो में, कोड ब्लॉक आपको उन घटकों का चयन करने के लिए कहेगा जिन्हें आप स्थापित करना चाहते हैं। पूर्ण स्थापना का चयन करें, यह कुछ इस तरह दिखेगा; सुनिश्चित करें कि "MinGW Compiler Suite" चुना गया है क्योंकि यह विकल्प आपके सिस्टम पर जीसीसी (GCC) को स्थापित करेगा। Step - 06}. गंतव्य फ़ोल्डर (Destination Folder) का चयन करें, इसे डिफ़ॉल्ट पर रखें और Next पर क्लिक करें। Step - 07}. इंस्टॉलर इंस्टॉलेशन को पूरा करने के लिए आगे बढ़ेगा। Step - 08}. इंस्टॉलेशन पूरा करने के बाद, कोड ब्लॉक आपको इसे चलाने (Run) के लिए संकेत देगा। No पर क्लिक करें और फिर Next बटन पर क्लिक करें। इंस्टॉलर से बाहर निकलने के लिए Finish पर क्लिक करें। यह विंडोज़ पर कोड ब्लॉक की स्थापना को पूरा करता है। CodeBlocks इंस्टॉल हो जानें के बाद जब आप पहली बार CodeBlocks के आइकॉन पर क्लिक करके उसे लॉन्च करेगें तो आपको कुछ Configure Steps को फॉलो करना हैं। इसके बाद अब आपको CodeBlocks IDE की होम स्क्रीन दिखाई देंगी। हमने सफलतापूर्वक अपनें कंप्यूटर में CodeBlocks को इंस्टॉल कर लिया हैं, इसके बाद आप इसमें कोड लिखने के लिए तैयार हैं।
- Rules For Creating A C Program - एक सी प्रोग्राम बनाने के नियम
सी में प्रोग्राम बनाने के लिए निम्नलीखित नियम होते हैं; इसमें सभी कीवर्ड ( keyword ) लोवरकेस में होते हैं। सी भाषा एक केस सेंसिटिव होता हैं। जैसे कि if else और IF ELSE से अलग होता हैं। कीवर्ड्स (keywords) शब्दों का उपयोग किसी भी दुसरे उद्देश्य के लिए नहीं हों सकता, अर्थात् ये फंक्शन (फलन) के नाम के वेरिएबल के रूप में उपयोग नहीं हों सकते हैं। कमेंट्स के लिए सी भाषा में /* ......... */ और // का उपयोग किया जाता हैं। जब प्रोग्राम का कार्यान्वयन (एक्जिक्यूशन) शुरू होता हैं, तब हम main() फंक्शन का हमेशा पहले कॉल किया जाता हैं।
- Where And Why Is C Used? - C का उपयोग क्यों और कहां होता हैं?
C को शुरू में सिस्टम प्रोग्रामिंग के लिए इस्तेमाल किया गया था। एक सिस्टम प्रोग्राम कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम या उसके सपोर्ट यूटिलिटीज का एक हिस्सा बनाता है। ऑपरेटिंग सिस्टम (OS), दुभाषिए (interpreter), संपादक (editor) आमतौर पर सिस्टम प्रोग्राम कहलाते हैं। यूनिक्स (Unix) ऑपरेटिंग सिस्टम को C का उपयोग करके विकसित किया गया था। आज, कई प्रोग्रामर द्वारा सी भासा का उपयोग इसकी पोर्टेबिलिटी और दक्षता के कारण सभी प्रकार के कार्यों को प्रोग्राम करने के लिए किया जा रहा है। लगभग सभी कंप्यूटरों के लिए C कंपाइलर उपलब्ध हैं। किसी विशेष मशीन पर C में लिखे गए कोड को संकलित किया जा सकता है और कुछ या कोई परिवर्तन नहीं करके भी दूसरी मशीन पर चलाया जा सकता है अर्थात यह एक पोर्टेबल भाषा है। इसके अलावा सी कंपाइलर बहुत तेज ऑब्जेक्ट कोड उत्पन्न करता है। उपरोक्त के अलावा C एक असेंबली भाषा की गति प्रदान करता है, लेकिन एक स्ट्रक्चर्ड भाषा के कुछ प्रतिबंध होते हैं। प्रोग्रामर कार्यों का एक अनूठा लाइब्रेरी बना और बनाए रख सकते हैं जिसका उपयोग कई अलग-अलग प्रोग्राम्स द्वारा किया जा सकता है। इस प्रकार बड़ी प्रोजेक्ट्स को कम से कम प्रयास के दोहराव के साथ आसानी से प्रबंधित किया जा सकता है।












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